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ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकने के पक्ष में अमेरिकी सीनेट, अपनी ही पार्टी के सांसदों पर भड़के राष्ट्रपति

अमेरिकी सीनेट ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई सीमित करने वाला प्रस्ताव पारित कर दिया। फैसले से नाराज डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ही पार्टी के सांसदों पर निशाना साधते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

US Senate VS Trump: अमेरिका की राजनीति में ईरान को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सीनेट ने एक ऐसे प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाना है। इस फैसले ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति को बड़ा झटका दिया है। खास बात यह है कि प्रस्ताव के समर्थन में कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी मतदान किया, जिससे ट्रंप की नाराजगी खुलकर सामने आ गई।

सीनेट का बड़ा फैसला

सीनेट द्वारा पारित किए गए इस प्रस्ताव को “वॉर पावर्स रेजोल्यूशन” कहा जा रहा है। इसका मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बड़े सैन्य अभियान से पहले राष्ट्रपति को संसद की स्पष्ट मंजूरी लेनी पड़े। प्रस्ताव में कहा गया है कि ईरान से जुड़े किसी भी संघर्ष में अमेरिकी सेना की भागीदारी को सीमित किया जाए और बिना संसदीय स्वीकृति के सैन्य कार्रवाई आगे न बढ़ाई जाए।

संसद में बढ़ी चिंता

जानकारों के मुताबिक, यह प्रस्ताव कानूनी रूप से पूरी तरह बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व काफी बड़ा माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी संसद के भीतर ईरान नीति और संभावित सैन्य टकराव को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं। कई सांसदों का मानना है कि किसी नए युद्ध में शामिल होने से पहले विस्तृत बहस और संसदीय सहमति जरूरी है।

ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया

सीनेट में प्रस्ताव पारित होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने फैसले को गलत समय पर उठाया गया कदम बताया और आरोप लगाया कि इससे अमेरिका के विरोधियों को गलत संदेश जाएगा। ट्रंप ने विशेष रूप से उन रिपब्लिकन सांसदों की आलोचना की जिन्होंने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर प्रस्ताव का समर्थन किया। उनका कहना था कि इस तरह के कदम से अमेरिका की बातचीत और दबाव की रणनीति कमजोर हो सकती है।

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पर दबाव की नीति प्रभावी साबित हो रही थी और अमेरिकी रुख के कारण तेहरान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ रहा था। उनके अनुसार, ऐसे समय में संसद का यह फैसला कूटनीतिक प्रयासों को प्रभावित कर सकता है।

संसद बनाम राष्ट्रपति

इस पूरे घटनाक्रम की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि अमेरिकी रक्षा विभाग कांग्रेस से अतिरिक्त रक्षा बजट की मांग कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अरबों डॉलर की यह राशि सैन्य तैयारियों, हथियारों की भरपाई और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए मांगी गई है। ऐसे में संसद के भीतर सैन्य खर्च और विदेश नीति को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका में राष्ट्रपति और संसद के अधिकारों के बीच संतुलन की बहस को भी सामने लाता है। फिलहाल सीनेट के इस फैसले ने अमेरिकी राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

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